सेना के कमांडरों का द्विवार्षिक सम्मेलन नई दिल्ली में 8 अप्रैल से जारी है जो 13 अप्रैल, 2019 को संपन्न होगा। यह सम्मेलन भारतीय सेना की योजना एवं क्रियान्वयन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेना में कर्मठता सुनिश्चित करने के लिए कॉलेजिएट सिस्टम के जरिए फैसले लिए जाते हैं जिसमें सेना के कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

सेना के कमांडर सम्मेलन में सुरक्षा की मौजूदा गतिविधियों, ऊभरते सुरक्षा हालात, सैन्य संचालन क्षमता में बढ़ोतरी और विपरीत परिस्थितियों में युद्ध के हालात से निपटने की क्षमता बढ़ाने को लेकर समग्र रूप से विचार किया गया।

कमांडर सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय सेना शांतिपूर्ण सुरक्षा माहौल के लिए प्रतिबद्ध है और यह संभावित खतरों, चुनौतियों से सम्पूर्णता से निपटेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि देश में आतंक के लिए कोई जगह न रह जाए। सम्मेलन के दौरान सेना की तैयारियों, तीनों सेनाओं के बीच ताल-मेल, सैन्य कूटनीति, संयुक्त अभ्यास जैसे मसलों की समीक्षा की गई।

कमांडरों के सत्र से पहले सेना के अधिकारियों ने समकालीन मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराई। इसमें साइबर खतरे को कम करने, प्रबंधन और संचार को सरल बनाने एवं डाटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। इसमें प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया।

तीनों सेना संयुक्त रूप से भविष्य के सभी टकरावों का सामना करने की योजना बनाएंगे और उसे लागू करेंगे। वायु सेना अध्यक्ष मार्शल बी.एस. धनोवा ने गहरी समझ विकसित करने और मिलजुल कर काम करने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दूरदृष्टि

और उच्च विश्वसनीयता एवं समन्वित क्रियान्वयन के लिए विचारों पर जोर दिया। नौसेना अध्यक्ष एवं चीफ ऑफ स्टॉफ समिति के चेयरमैन एडमिरल सुनील लांबा ने भी सैन्य कमांडरों को संबोधित किया और संयुक्त अभ्यासों एवं समुद्र की चुनौतियों पर जोर दिया।

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